रसायन विज्ञान – 3

                                                               तत्वों का आवर्ती वर्गीकरण

# मेंडलीफ का आवर्त नियम

१. उन्नीशवीं शताब्दी के मध्य में रशियन वैज्ञानिक डी. आई. मेंडलीफ ने तत्वों तथा उनके यौगिकों के तुलनात्मक अध्ययन से एक नियम प्रस्तुत किया जिसे मेंडलीफ का आवर्त नियम कहते हैं।

२. मेंडलीफ के आवर्त नियम के अनुसार – तत्वों का भौतिक एवं रासायनिक गुण उनके परमाणु भारों के आवर्त फलन होते हैं।

३. मेंडलीफ द्वारा बनाई गयी आवर्त सरणी में नौ वर्ग और सात आवर्त थे।

४. मेंडलीफ ने उस समय तक ज्ञात सभी तत्वों के शामिल करने के अतिरिक्त बहुत से अज्ञात तत्वों के लिए स्थान रिक्त रखे थे।

# मेंडलीफ की आवर्त सारणी के दोष

१. हाइड्रोजन को क्षार धातु एवं हेल्लोगेन जैसे दोहरे व्यवहार के कारन दोनों वर्गों में रखा गया।

२. समान गुण वाले तत्वों को अलग अलग रखा गया; जैसे – Cu और Hg, Ag और Ti

३. उच्च परमाणु भार वाले तत्वों को कम परमाणु भार वाले तत्वों के पहले रखा गया है , जैसे – आयोडीन (126.92) को टेल्यूरियम ( 127.61 ) के बाद रखा गया है।

४. समस्थानिकों के लिए स्थान नहीं है।

५. ८वें वर्ग में तीन तत्वों को एक साथ समूहित करना।

# आधुनिक आवर्त सारणी

१. आधुनिक आवर्त सारणी मोस्ले के नियम पर आधारित है। इसके  तत्वों के गुण उनके परमाणु  आवर्त फलन होते हैं।

२. आधुनिक आवर्त-सारणी में आवर्त की संख्या  है एवं वर्ग संख्या 9 होती है।

३. वर्ग I  से लेकर VII तक दो उपवर्गों A एवं B में बँटे हैं, इस प्रकार उपवर्गों सहित कुल वारों की संख्या १८ है।

४. प्रत्येक आवर्त का प्रथम सदस्य क्षार धातु है, और अंतिम सदस्य कोई अक्रिय गैस। सिर्फ पहले आवर्त का पहला सदस्य हाइड्रोजन है, जो अपवाद है।

५. आधुनिक आवर्त सरणी में परमाणु संख्या 57 से लेकर 71 तक को लेंथेनाइड श्रेणी एवं परमाणु संख्या ८९ से लेकर १०३ तक को ऐक्टिनाइड श्रेणी कहा जाता है।

६. आयनन विभव : ऊर्जा की वह न्यूनतम मात्रा है, जो तत्व की एक गैसीय परमाणु की बाह्यतम कक्षा से एक इलेक्ट्रान को निकाल बहार करने के लिए आवश्यक है।

७. इलेक्ट्रान बंधुता – जब उदासीन परमाणु एक इलेक्ट्रान ग्रहण करता है, तो उसके फलस्वरूप उत्पन्न ऊर्जा को इलेक्ट्रान बंधुता कहते हैं।

८. वर्ग VII A के तत्वों की इलेक्ट्रान बंधुता उच्च होती है।

९. सबसे अधिक इलेक्ट्रान बंधुता क्लोरीन की होती है।

१०. विद्युत् – ऋणात्मकता : किसी तत्व की परमाणु की वह क्षमता, जिससे वह साझेदारी की इलेक्ट्रान जोड़ी को अपनी और खींचती है, उसे उस तत्व की विद्युत् ऋणात्मकता कहते हैं। फ्लोरिन की विद्युत् ऋणात्मकता सबसे अधिक होती है।

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