रसायन विज्ञान – 6

अम्ल, क्षारक और लवण

अम्ल – अम्ल वे योगिक पदार्थ हैं, जिनमे एक या एक से अधिक विस्थापनशील हाइड्रोजन परमाणु विद्यमान हो तथा जिन्हे अंशतः या पूर्णतः धातुओं के सदृश आचरण करने वाले मूलकों द्वारा विस्थापित करने पर लवण का निर्माण होता हो, जो क्षारक या क्षार से अभिक्रिया कर लवण एवं जल बनाते हों, जिनके जलीय घोल नीले लिटमस को लाल करते हों तथा जो स्वाद में खट्टे हों।

अम्ल के गुण :-
(१) अम्ल स्वाद में खट्टा होता है।
(२) अच्छे एवं प्रबल अम्ल विद्युत् के सुचालक होते हैं।
(३) अम्ल धातु से क्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करते हैं।
(४) भस्म एवं क्षार से प्रतिक्रिया करके लवण और जल बनाता है।
(५) नीले लिटमस पत्र तथा मिथाइल ऑरेंज को लाल कर देता है।

अम्लों का वर्गीकरण – अम्ल दो प्रकार के होते हैं :-
(१) ऑक्सी अम्ल – जिन अम्लों में केवल हाइड्रोजन उपस्थित रहता है, उन्हें ऑक्सी अम्ल कहते हैं। जैसे – सल्फ्यूरिक अम्ल , नाइट्रिक अम्ल।
(२) हाइड्रा अम्ल – जिन अम्लों में केवल हाइड्रोजन उपस्थित रहता है, हीड्रा अम्ल कहते हैं। इसमें ऑक्सीजन नहीं होता है। जैसे – हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, HBr

अम्लों का उपयोग –

१) सल्फ्यूरिक अम्ल का उपयोग : पेट्रोलियम के शोधन में, कई प्रकार के विस्फोटक बनाने में, रंग एवं औषधि बनाने में, संचायक बैटरी में आदि।

२) नाइट्रिक अम्ल का उपयोग : औषधि के निर्माण में, उर्वरक बनाने में, फोटोग्राफी में, विस्फोटक पदार्थों के निर्माण में, अम्लराज बनाने में, प्रयोगशाला में अभिकर्मक के रूप में आदि।

३) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का उपयोग : प्रयोगशाला में अभिकर्मक के रूप में, अम्लराज बनाने में, रंग एवं औषधि निर्माण में आदि।

४) एसिटिक अम्ल का उपयोग : विलायक के रूप में, सिरका निर्माण में, एसीटोन बनाने में, खट्टे खाद्य पदार्थ बनाने में आदि।

५) फोरमिक अम्ल का उपयोग : जीवाणुनाशक के रूप में, फलों को संरक्षित करने में, रबड़ के स्कंदन में, चमड़ा उद्योग में आदि।

६) ऑक्सीलिक अम्ल : फोटोग्राफी में, कपड़ों की छपाई व रंगाई में, चमड़े के विरंजक के रूप में, कपडे पर स्याही के धब्बों को हटाने में आदि।

७) बेन्जोइक अम्ल का उपयोग : दवा व खाद्य पदार्थों के संरक्षण में आदि।

८) सिट्रिक अम्ल का उपयोग : धातुओं को साफ करने में, खाद्य पदार्थों व दवाओं के निर्माण में, कपड़ा उद्योग में आदि।

*अम्ल का ph मान 7 से कम होता है।

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