रसायन विज्ञान – 4

रासायनिक बंधन

इलेक्ट्रान  के पुनर्वितरण के फलस्वरूप बने बंधन को परमाणु बंधन कहते हैं। परमाणु बंधन तीन प्रकार के होते हैं – १. वैद्युत संयोजी बंधन  २. सहसंयोजी बंधन  ३. उपसंयोजी बंधन

. विद्युत संयोजी बंधन : जब बंध का निर्माण इलेक्ट्रान के स्थान्तरण के द्वारा होता है, तो उसे विद्युत संयोजी बंध कहते हैं।

  • आयनिक यौगिक के गुण : (i) आयनिक योगिक ध्रुवीय घोल में प्रायः घुलनशील होती है।

                                                          (ii) द्रवणांक एवं क्वथनांक उच्च होते हैं।

                                                          (iii) जलीय घोल विद्युत् का सुचालक होता है।

                                                          (iv) आयनन की मात्रा प्रायः उच्च होती है।

. सहसंयोजी बंधन : जब दो सदृश या असदृश परमाणु अपनी बाह्यतम कक्षा के एल्क्ट्रॉनों का आपस में साझा करके संयोग करते हैं तब उनके बिच स्थित बंध को सहसंयोजन बंधन कहते हैं।

  • सहसंयोजी योगिक के गुण :
  • (i) सहसंयोजी बंधन दृढ़ और दिशात्मक होता है। अतः वे विभिन्न स्थानिक अवस्था में रहते हैं, तथा त्रिविम समावयवता प्रदर्शित करते हैं। 
  • (ii) सहसंयोजी यौगिक आणविक रूप में रहते हैं, न कि आयनिक रूप में। इस कारण ये घोल की अवस्था में विद्युत् के कुचालक होते हैं।
  • (iii)  ताप, दाब की सामान्य अवस्था में ये प्रायः गैस, वाष्पशील द्रव एवं मुलायम ठोस पदार्थ होते हैं।
  • (iv) इनका द्रवणांक एवं क्वथनांक निम्न होता है।
  • (v) ध्रुवीय घोलकों में प्रायः अघुलनशील, किन्तु अध्रुवीय घोलकों में प्रायः घुलनशील होता है।

. उपसहसंयोजी बंधन : ऐसा बंध जो दो परमाणुओं के बीच एक इलेक्ट्रान जोड़ी की साझेदारी से बनता है, किन्तु साझेदारी का इलेक्ट्रान जोड़ी सिर्फ एक ही परमाणु द्वारा प्रदत्त होती है। उपसहसंयोजी बंधन में जो परमाणु इलेक्ट्रान जोड़ी प्रदान करता है, उसे प्रदाता कहते हैं और जो परमाणु इलेक्ट्रान जोड़ी को स्वीकार करता है उसे स्वीकारक कहते हैं।

  • सिग्मा बंध : जब दो परमाणुओं के ऑर्बिटल एक दूसरे से एक – रैखिक अक्ष पर अति व्यापन करते हैं तब दोनों परमाणुओं के बीच बने बंधन को सिग्मा बंधन कहते हैं।
  • पाईबंध :  परमाणिक ओर्बिटलों के पार्श्व अतिव्यापन होता है, तो इससे निर्मित बंधन को पाई – बंधन कहते हैं।

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