झारखण्ड २०३०

A.I

एक वक्त था जब लोग कहानियाँ  पढ़कर कहावत बनाया करते थे किताबो और साहित्यो से सीख लिया करते थे उन्ही में से एक प्रचिलित कहावत है  ” जो करना है अभी करले बन्दे …..  कल किसने देखा ?” लेकिन अगर ऐसा है तो फिर कल की उम्मीद के बिना हम आज की नींव भी तो नहीं रख सकते।  इस कहावत से हमें एक बात तो समझ आती है की  हमें अपना  आज को बेहतर बनाना है, हर कल  एक दिन आपका आज होगा, और वो कल बेहतर होगा। इस तकनिकी दौर में बदलाव काफी तेजी से हो रहा है पहले के मुकाबले, और इस बदलाव को आप महसूस कर सकते है।

आज इस लेख के माध्यम से  इन्ही सारी बातों पर हम और आप अभी गौर फरमाते हैं और जानेगे की आने वाला १० साल कैसा होगा –

संचार और प्रौद्योगिकी

अगर बात की जाये communication and technology क्षेत्र में तो जाहिर सी बात है कि इसमें बहुत तेजी से और बहुत ज्यादा विकास होने वाला है  आने वाले २०३० तक। जब हम यह बाते करते है तो हमें विज्ञान कथा फिल्में याद आने लगते है, और सवाल भी मन में आने लगते है, की क्या हमारी दुनिया सचमुच बदल जाएगी ?  है  कुछ हद तक यह सही भी है  कारण एक ही है इंसान की जरुरत जो थमने या ठहरने का नाम नहीं लेती है। अगर हम अपनी नज़र पीछे १० साल ले जाएँ तो हमें अच्छे से ज्ञात है कि पहले हमलोग किस तरह से कम्यूनिकेट करते थे।

९० दशक के शुरुआत से

 पत्र का दौर था लोग डाक के माध्यम से पत्र भेजा करते थे, एक पत्र दूसरे वयक्ति तक पहुंचने काफी वक्त भी लगता था और यही एक तरीका था जिसके माध्यम से लोग अपने भावनाओ का आदान प्रदान करते थे, सारे  सरकारी या गैर सरकारी काम भी खत के जरिये हो पाते थे | कहीं से कुछ पारसेल मंगवाना हो या पैसे मंगवाना हो सभी काम डाक के जरिये ही हो पाता यह परिक्रिया पूरी दुनिया में लगभग ९०  दसक के अंत तक चला।

कहा जाता था  भारत संचार और प्रौद्योगिकी के मामले में ५-८ से आठ  साल पीछे चल रहा है, परन्तु पिछले कुछ सालो में बहुत सरे बदलाव हुए है लोगो ने technology को काफी तेजी से अपनाना शुरू कर दिया है ।  

भारत में  फोन और संचार का शुरुआत डायलर टेलीफोन से शुरू होता है  यह फ़ोन एक केबल के माध्यम से जुड़ा होता था और एनालॉग सिगनल की मदद से बातो का आदान प्रदान करता  था। झारखण्ड में भी यही प्रचलन था क्यूंकि झारखण्ड भी भारत के विकसित राज्यों में से नहीं था न ही कोई बड़ा शहर  था, बड़े शहरो में जमशेदपुर और राँची ही था पर वे उतना विकसित नहीं थे एक मेट्रो शहर की तरह।

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   संचार और पौद्योगिकी को सामान रूप से लोग अपनाने लगे थे पुरे भारत में, झारखण्ड के लोग भी इसे अपनाने में कोई कसर नहीं छोड़ा,यह बात सच है  की     शुरुआत में झारखण्ड में बस कुछ गिने चुने लोगों के पास ही mobile phone हुआ करते थे जो किसी ऊँची पद में हो या फिर जिनके पास अच्छी खासी धन दौलत हो और साथ ही शिक्षित हो क्योंकि अगर उसकी समझ नहीं होगी तो उसको चलाना मुश्किल होता । वरना वही कहावत हो जाती कि – ” बन्दर क्या जाने अदरख का स्वाद “|

मोबाइल और टेक्नोलॉजी ने बातो का आदान प्रदान का तरीका ही बदल दिया लोग आसानी से अब बात कर सकते है निजी तौर पर। अब किसी भी काम को करने के लिए खत या डाकघर की जरुरत नहीं पड़ती सारे काम चाहे  बात करनी हो, हाल चल पूछनी हो या कोई दस्तावेज भेजना हो, पैसे ट्रांसफर करने हो या बैंक में पैसे डालने हो सभी काम मोबाइल फ़ोन और टेक्नोलॉजी से हो जाते हैं।

डाक और कुरियर के मांग में भी बदलाव होने लगी लोगो के मांग को देखते हुए उनके भी कार्य प्रणाली में बदलाव हुआ, तकनीक लोगो का जीवन आसान बना रहा है।  जिस गति से हम जा रहे हैं उसके आधार पर २०३० आते-आते ऐसा होगा कि शारीरिक रूप से कोई भी काम को करने की जरुरत नहीं पड़ेगी,  बस इच्छा जताई और हाज़िर हो जायेगा सब कुछ | झारखण्ड के तमाम लोग तब २०३० तक मोबाइल फ़ोन्स और टेक्नोलॉजी रूबरू हो जायेंगे।

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यातायत एवं परिवहन

 ट्रांसपोर्टेशन और यातायात साधन के प्रति भी लोगो का नजरिया और इच्छा बदलने लगा है  हम वापस अपना ध्यान पिछले कुछ सालों में ले जाएँ तो झारखण्ड की जो स्थिति थी वो बहुत्त ही दयनीय रही थी लोग उतना सफर नहीं करते थे क्यूंकि उस वक्त उतनी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थी वो चाहे मार्ग का हो या साधन का । एक जगह से दूसरे जगह जानें के लिए भी घंटो या पुरे दिन-दिन बस का इंतज़ार करना पड़ता था।  गांव देहात के लोगों को  ज्यादा मुश्किलो का सामना करना पड़ता था सड़क मार्ग की वजह से और सड़क भी उतने कारगर नहीं थे। लोग पहले रिक्शॉ का इस्तमाल करते थे और आज भी रिक्शा है लेकिन कुछ गिने चुने जगह के लिए, मार्ग पक्का और विस्तृत होने की वजह से लोग  साईकिल और रिक्सा का प्रयोग भी कम करने लगे है।

अब आने  वाले १० सालों की बात करें तो यातायात साधनों में एक बहुत बड़ा बदलाव आने वाला है जिसकी शुरुवात आज के दौर में हो चुकी है। ये बदलाव है.

स्वचालन और कृत्रिम बुद्धि

ऐसा माना  जा रहा है कृत्रिम बुद्धि और स्वचालन एक ऐसा बदलाव है, अब तक जो बदलाव हुआ है दसको से उससे ज्यादा बदलाव होगा आधे से आधे समय में  और ये बदलाव हर बिज़नेस और शिक्षा के क्षेत्र में होगा 

 कृत्रिम  बुद्धि  की मदद से सारी गाड़ियां धीरे-धीरे ड्राइवर के बिना चलेंगी और इसकी पहल GOOGLE ने कर दी है और उसके अलावा हर गाड़ी बनाने वाली कम्पनियाँ इस कार्य में जुट गए है।  बड़ी-बड़ी transport कार बनाने वाली कंपनियां भी बिना manpower के सिर्फ रोबोटिक मशीनों की सहायता से अपने कार बना रही है , जैसे BMW cars . आंकड़ों के आधार पर यदि कहे तो सारे सार्वजनिक बस ,टैक्सी , रेलगाड़ी आदि सभी अपना रुख ऑटोमेशन की ओर ले जाएँगी। और इसमें झारखण्ड राज्य भी कुछ पीछे नहीं होगा। ये बात भी सच है की झारखण्ड में बदलाव की गति थोड़ी धीमी है अन्य राज्यों की तुलना में क्यूंकि लोगों की जागरूकता अब भी मंद गति पर सवार है।

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इंडस्ट्री यानि उद्योग क्षेत्र में भी ऑटोमेशन की टेक्नोलॉजी अपनायी जाएगी। दुनिया में कुछ कम्पनी ने तो इसकी झलक दिखा ही दी है। झारखण्ड राज्य में भी  कम्पनी है जैसे – टाटा कंपनी , HEC कंपनी। वैसे सुरुवात इन कंपनी के साथ हो सकती है। लेकिन छोटे पायदान वाली कंपनी भी कुछ कम नहीं है और जिस तरह से प्रॉफिट की दौड़ चल पड़ी है , तो ये कंपनी भी AUTOMATION की और अपनी रफ़्तार को ले जायेंगे।

हमने टेक्नोलॉजी की नज़र से तो देख ली की इसमें मेहनत काम और मुनाफा ज्यादा होगा। लेकिन अगर मजदूर लोगों की बात करें तो झारखण्ड के लोगों की स्थिति और भी बदतर होती जाएगी इसका बड़ा कारण यह है की, दौर जिस तेजी से बदल रहा है उस तेजी से बदलाव को लोग अपना नहीं पा रहे है  | और इस बीच  में AUTOMATION का रुख इनके लिए बहुत बुरे परिणाम दे सकता है। इनका कारण एक ही है – शिक्षा और जागरूकता में कमी |

यही कारण है कि बहुत से किसान अब खेती , कृषि को त्याग कर मजदूर बनने के निकल पड़े हैं। अगर कृषि क्षेत्र में सही समय पर इन्हे मार्गदर्शक और टेक्नोलॉजी की मदद मिलती तो इसी क्षेत्र में हमारे राज्य की economy अन्य सभी राज्यों से परे होती।  लेकिन अब भी देर नही हुई है , अगर सरकार न सही युथ जनरेशन ही इसपर कुछ कदम अपने से बढ़ाएंगे तो झारखण्ड राज्य को बेहतर बनाने  से  कोई नहीं रोक सकता। लोग स्टेटस को शेयर करने के बजाय यदि मोबाइल्स और नेटवर्क का सही इस्तमाल करे तो एक-एक व्यक्ति तक ज्ञान और तकनीक को पहुँचने से नहीं रोक सकते। तो खुद को सतर्क और जागरूक रखें क्योंकि अगर आज नीव बनाएंगे तभी कल के भविष्य की इमारत मजबूत बनेगी । तकनीक हमारे समाज को बेहतर बनाने में मदद करेगी परन्तु उसे बेहतर तरीके से अपनाना एक चुनौती है।

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