घबराहट से कैसे निपटें?(How to Handle Nervousness? )

बोलने से सम्बंधित घबराहट सामान्य बात है। एक एथलीट की तरह जो खेल के लिए तैयार हो, हम भी excitement का flow अपने अंदर महसूस करते हैं। यदि हम तैयार और अच्छी तरह अभ्यास किये हुए हैं तो हम घबराहट को ऊर्जा में परिवर्तन कर सकते हैं।

घबराहट से निपटने का तरीका


अगर बोलने से पहले हमारे हाथ ठन्डे और उनमें पसीना महसूस होता है तो उसे इस बात को संकेत क रूप में लें  कि अब हम बोलने के लिए तैयार हैं। कोई दूसरा हमारा हाथ नहीं पकड़ेगा इसीलिए सिर्फ हम ही ये जानते हैं कि वे ठन्डे और पसिनेयुक्त हैं।  
अक्सर पेशेवर स्पीकर भी बोलने से पहले व्यग्र और तनाव महसूस करते हैं।

वास्तव में बोलने से पूर्व दबाव एक normal, emotional and physical condition है। ये इस बात को सुनिश्चित करने में हमारी मदद करती है कि हम alert और mentally active है। इसीलिए हमारा goal tension को ख़तम करने के बजाय उसको कण्ट्रोल करना होना चाहिए।


बोलते समय / speech देते समय अगर हम Nervous feel करते हैं तो Control करने के कुछ TIPS हैं –

(1)  मुँह सूखना ( DRY MOUTH ) – यदि बोलते -बोलते मुँह सुख जाये तो थोड़ा सा break लेते हुए अपना head को सोचने वाले position में झुकना है और अपनी जुबान का एक सिरा धीरे से काटना है। इससे पुनः मुँह में लार प्रवाहित होगी। और एक गिलास पानी अपने पास रखना है। और break लेते हुए पानी की थोड़ी – थोड़ी  घूंट पिटे रहना है।
एक ही बार में पानी का बड़ा घूंट नहीं भरना है अन्यथा हमारा गाला अटक सकता है। Lifesaver या mint का use नहीं करना है , क्यूंकि ये उच्चारण में बढ़ा डालते हैं और हम इन्हे असावधानी से निगल सकते हैं।

(2) अत्यधिक लार ( too much Sliva ) – यदि बोलते – बोलते हमारा मुँह लार से भर जाता है और अगर हमें लगता है कि  हमारे मुँह से आगे वाली पंक्ति पर हमारे थूंक के छीटें जा रहे हैं तो अपनी जीभ के सिरे को ऊपर के दांतों के पीछे कठोर सिरे पर रखना है मतलब ” T ” और ” D ” बोलने की position में मुँह खोलना है और मुँह से सांस लेना है। इस position में हवा जुबान और vocal chord को सुखाये बिना लार को सूखा देती है।

(3) भूल जाना ( DRYING UP ) – यदि हम बोलते – बोलते भूल जाएं या बोलने की sequence टूट जाये तो कुछ पल के लिए अपनी आँखें Audience से हटा लेना है। एक गहरी सांस लेना है और सांस धीरे – धीरे बहार छोड़ते हुए अपने NOTES पर ध्यान को केंद्रित करने की कोशिश करना है। बजाय अपनी लड़खड़ाहट की ओर।
अपने और अपने श्रोताओं को वापस लय में लाने में सहायता के लिए हम जो पहले discuss कर चुके हैं उसका कुछ भाग पुनः दोहरा सकते हैं। ऐसा करने में लगने वाला समय हो सकता है हमें बहुत ही लम्बा लगे परन्तु वास्तव में ये कुछ पलों की ही बात होगी। हमारे Audience ज्यादातर notice नहीं करेंगे।

(4) गला कड़ा हो जाना ( TIGHT THROAT ) – इसके लिए चुपके से जम्हाई लेना सीखना है। हम सबने ये स्कूल में भी किया है।
सर झुकाकर होठों को बंद करना है। फिर अपने गले का पिछले हिस्सा थोड़ा खोलते हुए नाक से थोड़ी सांस अंदर खींचना है। अपने गले में होने वाले तनाव ख़त्म करने  का सबसे best तरीका है। जब हमें लगे कि हमारा गला कड़ा हो रहा है , तो पानी नहीं पीना है।  ये टेंशन को और बढ़ा सकता है। इसके बजाय चुपके से जम्हाई लेते हुए गला खोलना है।

(5) कम्पन ( SHAKING ) – हाथों और घुटने का कांपना डर का परिणाम नहीं है। ये extra energy को इधर – उधर बिखरने की शरीर की आतंरिक प्रक्रिया है। desk को कसकर पकड़कर या अपने हाथ अपनी जेब में डालकर इस प्रक्रिया को कण्ट्रोल करने की कोशिश नहीं करना है। इस तरह हम केवल प्रॉब्लम को और बढ़ाएंगे ही।  इस extra energy का use पॉजिटिव way  में करना है।


इसके लिए हमें inspirational signs और body movements का use करना है।
हमें पहले ही practice करके रखना है कि  हम जो movements use करेंगे वो हमारे words से match करे। और साथ ही उन movements को complete और flow में होने देना है।
हमें audience से जुड़ने के लिए, एक विराम को meaningful बनाने के लिए या किसी बात पर जोर देने के लिए हमारी physical movements भी self-directed होनी चाहिए। अचानक चलना या घबराहटपूर्ण दोहराया गया संकेत हमारा भाषण बर्बाद कर सकता है। 

(6) सांस उखड़ना ( shortness of breath ) – यदि हमारी सांस उखड़ने लगे या बोलते समय सांस लेना मुश्किल हो रहा है तो बोलना थोड़े देर के लिए रोक देना है। अपना सर नीचे झुका लेना है और audience से अलग देखना है। अपना बांया हाथ अपने पेट के निचले हिस्से के पास ले जाना है और कन्धों को आराम देना है। अपने पेट के निचले हिस्से तक एक गहरी सांस लेना है। हमें अपने पेट का दबाव अपनी क्रॉस किए बाँहों पर महसूस होना चाहिए। अब सांस को धीरे धीरे अपने होठों से बहार निकलने देना है। अपना सर ऊपर उठाते हुए अगली सांस भी इसी तरह लेना है और बोलना शुरू कर देना है। गहरी सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया का ये एक संक्षिप्त रूप है जो हमे tensionfree करता है और हमारी breathing को normal करता है। 


(7) व्याकुलता ( Butterflies ) – हम कूल्हे और पेट की मांसपेशियों को संकुचित कर व्याकुलता से छुटकारा पा सकते हैं। इस स्थिति को रोक कर रखना है और फिर loose छोड़ देना है।

(8) चेहरे पर तनाव (Tension on Face ) – इसको दूर करने के लिए हमेशा बेवजह मुस्कुराना है। इससे न केवल हम बल्कि हमारे audience भी tensionfree होंगे।

(9) अपने Audience से मिलें ( Meet Your Audience ) – बोलने के लिए जाने से पहले , यथासंभव ज्यादा से ज्यादा audience से मिलना। इस तरह , वे सभी अच्छे दोस्त की तरह लगते हैं। 

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