झारखंड का काला सोना कोयला

झारखंड का खनिज संपदा कोयला

भारत हमारा देश जो अनंत सम्पदाओं का भंडार है और झारखंड हमारे देश का अभिन्न तथा अत्यंत महत्वपूर्ण राज्य है जो कई तरह की संपदा से भरी हुई है। उसमे से एक सम्पदा – कोयला जो कि अनेक तरह के उद्योग के लिए अहम भूमिका निभाता है। झारखण्ड के किस – किस इलाकों में इसके भंडार मौजूद है ? कितनी मात्रा में मौजूद है ? इस लेख के माध्यम से जानेंगे – 

झारखंड में कोयला बहुतायत में पाया जाने वाला जीवाश्म ईंधन है। यह देश की ऊर्जा संबंधी आवश्यकताओं का महत्वपूर्ण भाग प्रदान करता है। 

इसका उपयोग मुख्यत: ऊर्जा उत्पादन तथा उद्योगों और घरेलू जरूरतों के लिए ऊर्जा की आपूर्ति के लिए किया जाता है।  सिर्फ झारखण्ड ही नहीं हमारा देश भी अपनी वाणिज्यिक ऊर्जा संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु मुख्यतः कोयले पर निर्भर है। 

जैसा कि हम जानते हैं कि कोयले का निर्माण पादप पदार्थों के लाखों वर्षों तक संपीडन से हुआ है।  इसलिए संपीडन की मात्रा, गहराई तथा दबे रहने के समय के आधार पर कोयला विभिन्न रूपों में पाया जाता है।

दलदलों में क्षय होते पादपों से पीट बनता है, जिसमें काम कार्बन, नमी की उच्च मात्रा तथा निम्न ताप क्षमता होती है।  लिग्नाइट एक निम्न कोटि का भूरे रंग का कोयला होता है। यह मुलायम होने के साथ साथ अधिक नमी युक्त होता है। अधिक गहराई में दबे तथा अधिक तापमान से प्रभावित कोयले को बिटुमिनस कोयला कहते हैं।

वाणिज्यिक दृष्टि से यह सर्वाधिक लोकप्रिय है। धातुशोधक में उच्च श्रेणी के बिटुमिनस कोयले का प्रयोग किया जाता है।  इसका लोहे के प्रगलन में विशेष महत्व है। एन्थ्रेसाइट सर्वोत्तम गुण वाला कठोर कोयला है। 

भारत में कोयला दो प्रमुख भूगर्भिक युगों के शैल क्रम में पाया जाता है – एक गोंडवाना जिसकी आयु २०० लाख वर्ष से कुछ अधिक है तथा दूसरा टर्शियरी निक्षेप , जो लगभग ५५ लाख वर्ष पुराने हैं। गोंडवाना कोयला जो धातुशोधन कोयला है , इसके प्रमुख भंडार दामोदर घाटी, रानीगंज, झरिया, बोकारो में स्थित है। यानी हमारे राज्य झारखण्ड में इसकी मात्रा सर्वाधिक है।

झारखण्ड में कुल २३ कोयला खदानें हैं। हर कोयला खदान में खनन की अवधि ३० साल की होती है। तो इस हिसाब से ३ हज़ार करोड़ रूपए प्रति वर्ष झारखण्ड राज्य के हित में होती है और ३० साल का औसत आंकड़ा बनाया जाय तो 90 हज़ार करोड़ रूपए से अधिक का मुनाफा हमारे राज्य का हो सकता है। झारखण्ड राज्य में 103 वर्ग किलोमीटर से भी ज्यादा का क्षेत्र कोयला खदानों से घिरा है। यानि कि लगभग 386 करोड़ टन कोयले का भंडार है।

ब्लॉक                                                   स्थानक्षेत्रफल(. किमी)भंडार(मिलियन टन)
अशोक सेंट्रल नॉर्थ कर्णपुरा         4.87155.00
ब्रह्मडीहा                               गिरिडीह  0.875.00
बुंडू               नॉर्थ कर्णपुरा                5.41102.27
बुटाखाप                                    रामगढ़0.589.68
चकला                            नॉर्थ कर्णपुरा  8.6376.05
महुआ मिलन  नॉर्थ कर्णपुरा 10.99                                 101.24
सेरेगढ़ा                             नॉर्थ कर्णपुरा 3.70187.29
नॉर्थ धाडू                      नॉर्थ कर्णपुरा 11.33923.94
गोंदुपाड़ा             नॉर्थ कर्णपुरा 4.10176.33
चितरपुर            नॉर्थ कर्णपुरा 5.60222.44
चोरीटांड़ तिलैया  प. बोकारो  2.4997.04
जोगेश्वर              प. बोकारो  2.6684.03
लालगढ़                    प. बोकारो  2.9127.04
जयनगर              द. कर्णपुरा   1.3077.52
पतरातू                              द. कर्णपुरा   4.11450.00
टोकी सूद-3                       द. कर्णपुरा   2.23127.69
उमा पहाड़ टोला               राजमहल 9.76579.30
महुआ गाछी                राजमहल 7.73305.95
लातेहार                                         औरंगा   10.4322.04
राजहरा                                               डालटनगंज1.0922.50
रौता                                                  रामगढ़        1.767.00

खजाने की कमी नहीं है इस राज्य में,  परंतु केंद्र और राज्य सरकारों के बीच सही तालमेल नहीं होने की वजह से असमंजस की स्थिति है केंद्र सरकार खदानों को प्राइवेट हाथों में सौंपना चाहती है और राज्य सरकारें इससे राज्य का धरोहर होने का दावा कर रही है,

इसे  लोग  राजनीति के चश्मे से भी देख रहे हैं लोगों का  कहना है कि केंद्र और राज्य   सरकारों के राजनीतिक पार्टियां अलग होने की वजह से यह तकरार  हो रहा है वैसे इसमें आम जनता का कोई भी भागीदारी नहीं है ना ही कोई नुकसान है अगर  यह खनिज   खदान प्राइवेट हाथों में जाता है तो भी उन्हें मजदूरी  करने मिलेगी और  नहीं जाती है तब भी उन्हें मजदूरी  करने मिलेगी।

वर्तमान स्थिति में इन खदानों की नीलामी रुक चुकी है क्यूंकि स्थानीय लोग इसके विरुद्ध खड़े हैं यह कितना सत्य है यह कहना जरा मुश्किल है, हो सकता है इसमें राजनीतिक पार्टियां भी शामिल हो। परंतु लोगों का कहना है की अपनी वन सम्पदा से भरपूर इस प्राकृतिक धरोहर का विनाश नहीं होने देना चाहते हैं।

बात उनकी भी सही है यदि खनन प्रक्रिया शुरू हुई तो प्रकृति की सुंदरता ख़तम होती जाएगी साथ ही उस क्षेत्र के आस पास रहने वाले लोगों को भारी क्षति होगी। परंतु  सरकारें हमेशा  से ही खनन और प्राकृतिक  संपदा पर अपना अधिकार  थोपती रही है चाहे वह किसी भी पार्टी के सरकार हो प्राकृतिक संपदा  को अपने तरीके से प्रयोग कर मुनाफा कमाना चाहती है और विपक्षी पार्टियां हमेशा उनकी विरोध करती है विपक्षी पार्टियां खनन के आसपास बसे  स्थानीय लोगों को बहला-फुसलाकर सरकार के विरुद्ध खड़े होने के लिए  उकसाते  हैं और अपना विरोध प्रदर्शन करते हैं यह बरसों से चला आ रहा है और आज भी  यह स्थिति बरकरार है

Author:- Bably Kumari Source: Hindustan news

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