झारखण्ड का स्वर्ग सारंडा जंगल

saranda jungle

सारंडा जंगल की संक्षिप्त परिचय

एक वक्त था जब सारंडा जंगल सरायकेला के राजघराने साही परिवार का शिकार के लिए बेहतर जगह हुआ करता था। परन्तु आज सिर्फ एक जंगल के नाम से जाना जाता है।

यह जंगल लगभग ८२० वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है जो भारत एक राज्य झारखण्ड का मुख्य जंगल है इस जंगल की खासयत यह है की इसमें ४० प्रतिसत से ज्यादा आयरन जैसे खनिज पाए जाते है।

सारंडा जंगल में पाए जाने वाले पेड़ पौधे जो सबसे अधिक हैं वह है साल, सिमर, कुसुम,करम, महुआ, पलाश, केंदु, पियाल का पेड़, आसन का पेड़, गम्हार जंगली अमरूद, हाथी बेल, गरुड़ का पेड़ जो पहाड़ियों के ऊंचाई पर पाया जाता है भिजासाल, काला शीशम और कुछ जड़ी बूटियां जैसे बंधवा, गोल्डन जिंजर उसके अलावा कोरिया कुर्ची जैसे औषधीय पौधे भी मौजूद है और भी बड़े-बड़े पौधे, पेड़ पौधे, जैसे:- अर्जुन का पेड़ यह भी एक औषधि वृक्ष है बरगद का पेड़ भी मौजूद है जानकारों का मानना है की साल का पेड़ सारंडा जंगल के अलावा कोई और जंगल में उतना ज्यादा नहीं पाया जाता है।


जानवर में सबसे ज्यादा पाए जाने वाले जानवर


हाथी(सबसे ज्यादा पाए जाने वाला जानवर ), तेंदुआ, भालू, खरगोश, हिरण, जंगली सूअर इत्यादि।

फेमस पंछियों में


नीलकंठ कॉमन होप, धनेश, तोता, बटेर, तीतर, गौरैया, मोर, इत्यादि
सारंडा को छूते हुए 3 नदियां गुजरती है कोयल कारो और कोयला ये उतने बड़े नदी में नहीं है परन्तु यही मुख्य नदी माना जाता

सारंडा एक ऐसे जंगल है जिसमें बहुत सारे पानी के स्रोतों का भंडार है और इस जंगल में पानी की कमी कभी नहीं होती यह जानवरों के रहने के लिए अच्छे जंगलों में से एक है, जिनमें उनको अपने भरण-पोषण के लिए किसी भी तरह की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता यहां पर फल पत्ते पानी के स्रोत का अच्छा भंडार होने के कारण उन्हें हर तरह का सुविधा उपलब्ध हो जाता है

जानकारों का मानना है कि अभी पानी थोड़ी सी प्रदूषण होने लगे हैं पहले के मुकाबले माइंस और बहुत सारे कारखानों के काम के कारण, उनका यह भी मानना है कि इससे जानवरों पर बुरा असर पड़ेगा और आने वाला वक्त में उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है

पानी के प्रदूषण होने से जो नदी के आसपास की खेती है उन पर भी बुरे असर पड़ेंगे उनके फसल पर बुरा असर पड़ेंगे और जो फल सब्जी उत्पन्न होंगे वह भी पोस्टिक नहीं होंगे हालाँकि पानी प्रदुसित की समस्या सिर्फ उन्ही क्षेत्र में है जिन क्षेत्रो में माइंस और आयरन के कारखाने है।

वनो की कटाई और लोगो की जागरूकता

सारंडा जंगल में खूबसूरती तो प्राकृतिक ने दी है परंतु लोगों की जागरूकता में कमी और अपने स्वार्थ के लिए कुछ लोग इस जंगल को नुकसान भी पहुंचा रहे हैं उनमे से एक कारण है पेड़ पौधों की कटाई, पेड़ की कटाई को रोकने के लिए सरकारों ने कई कदम उठाए हैं परंतु अभी तक उन्हें किसी भी तरह का सफलता हासिल नहीं हुआ है उसमें कई तरह की कमेटी भी बनाई गई और वन विभाग द्वारा जागरूकता अभियान चलाया जाता है, पेट्रोलिंग भी किया जाता है।

उसके बावजूद भी अभी तक कोई कारगर परिणाम नहीं निकल पाया है और इस पर लगातार कटाई होती जा रही है छोटे पौधों को काटने से ज्यादा असर तो नहीं होता है परंतु अगर मोटे और बड़े वृक्षों को काटा जाए तो इसका असर होता है मिट्टी के कटाव और वन की खूबसूरती पर और जंगल में रहने वाले जीव जंतुओं के लिए भी और वह भी बुरा असर होता है।

सारंडा जंगल सिर्फ अपनी खूबसूरती के लिए ही नहीं जाना जाता बल्कि उसके अलावा भी बहुत सारी जाति और प्रजातियां के लिए भी जाना जाता है , कुछ आदिवासी गांव भी मौजूद है जो सारंडा के अंदर बाहर दोनों तरफ है और वह भी इस जंगल का एक हिस्सा माने जाते हैं, उनकी एक अलग संस्कृति होती है जो उनकी पहचान है सारंडा के जंगल के अंदर कई ऐसे गांव में जिनके अंदर उनका खुद का बाजार है जो अपने बनाए हुए सामान को उस बाजार में बेचते हैं और उसे जंगल के अंदर रहने वाले लोग ही खरीदते हैं वे लोग शहर में रहने वाले लोगों के जैसे तो नहीं रहते उनके जैसे रहन-सहन तो नहीं होता परंतु वह जो भी करते हैं उससे वह संतुष्ट होते हैं

सारंडा के जंगलों में रहने वाले आदिवासी जनजातियों का आय का स्रोत बहुत कम है वह ज्यादातर जलावन लकड़ियों को काटकर बेच कर अपना गुजारा करते हैं या फिर कुछ घरेलू उद्योग जैसे अपने हात से बनाये हुए कुछ चीजें, जड़ी बूटियां, फल यह सारी चीजें बेच कर अपना गुजारा करते हैं, उन्हें कठिनाइयों का सामना तब करना पड़ता है जब बारिश का मौसम आता है, बारिशों के मौसम में वही इन सारी चीजों को बेचने नहीं निकल सकते हैं, और खरीदार भी नहीं मिलते अगर खरीदार मिलते तो तो उन्हें उनके वस्तु का सही मूल्य नहीं मिल पाता।

वनों की लगातार कटाई और उसका रोकथाम

वनों की कटाई को रोकना एक चुनौती है इसके लिए सबसे पहले वहां के स्थानीय लोगों के लिए एक आय के स्रोत ढूंढना होगा और आय का स्रोत केवल यही है, वनो का कटाई का एकमात्र कारण केवल जंगल के लोग ही नहीं है उसका कारण बाहरी ताकत भी होती है उन्हें पैसे का लालच दे कर उनसे ये काम करवाया जाता है, और जंगल के लोग विवश हो कर उनकी हां में हां मिला लेते है ता की उन्ही पैसो से जब जून से सितम्बर के महीने में बारिश का मौसम आये तब वे अपना जरूरत को पूरा कर पाए।

सैलानियों के लिए सारंडा

जंगल के लोगो के लिए दूसरी आय के स्रोत केवल सैलानियों का आना है, यही सिर्फ एकमात्र उपाय हैं वैसे तो यह जंगल सैलानियों के लिए काफी अच्छा है परंतु सुरक्षा की दृष्टि से यह जगह उतनी कारगर तो नहीं है जिससे बेहिचक कोई भी इस खूबसूरत नजारा का आनंद उठाने आ जाए, लोगों की जागरूकता में कमी और सुरक्षा की दृष्टि से यह भी कारगर नहीं है पर आने वाले वक्त में यह मुमकिन हो पाएगा; हालांकि कई जगहों में गेस्ट हाउस और वोलिंटियर बनाये गए है सैलानियों के आकर्षण का केंद्र बनाने के लिए परन्तु ये जंगल के हर क्षेत्र में उपलब्ध नहीं है।


सरकार इस पर काम कर रही है,क्यूंकि सैलानियों का आकर्षण का केंद्र बनाना ही एक उपाय है जिससे शहर से दूर रह रहे लोगों लोगों का आय का स्रोत बनाया जा सके शायद सरकार इतनी गंभीर नहीं है इस सब चीजों को लेकर परंतु जंगल के अंदर रहने वाले उसके आसपास के रहने वाले लोगों का मानना है कि यह मुमकिन है पर सुविधाओं के अभाव के वजह से वे भी कुछ कर नहीं पाते,

इस खूबसूरत जंगल में और कई तरह की सुविधाएं उपलब्ध हैं रेल मार्ग सड़क मार्ग रेल मार्ग पहाड़ों के बीचो बीच है कई तरह की सुरंगों से गुजरता है और यह देखने लायक है इस जंगल की खूबसूरती का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते है जब आप ट्रेन पर यह बस पर बैठकर इन पहाड़ों के बीच से गुजरते हैं तो आप खिड़कियों के बाहर देखे बिना रह नहीं सकते जितना खूबसूरत नजारा होता है।

आप के मन में अगर कोई सुझाव हो तो आप जरूर भेजें इस लेख को और बेहतर बनाने के लिए धन्यवाद्

2 Replies to “झारखण्ड का स्वर्ग सारंडा जंगल”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *